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अरावली बचाने को मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला: नई माइनिंग पर लगा टोटल बैन, राज्यों को सख्त निर्देश जारी

नई दिल्ली :

देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के राज्यों की ‘लाइफलाइन’ मानी जाने वाली अरावली पर्वत श्रृंखला (Aravalli Range) को बचाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने आज एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC) ने साफ कर दिया है कि अब अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की नई माइनिंग लीज (New Mining Lease) नहीं दी जाएगी।

ऐतिहासिक फैसला: News18 इंडिया की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मोदी सरकार ने अरावली में नई माइनिंग लीज पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। (Image Source: Dintoday Composite/News18)

News18 इंडिया की रिपोर्ट के बाद एक्शन

सोशल मीडिया और ख़बरों में यह बात प्रमुखता से सामने आ रही है कि इस बड़े फैसले के पीछे News18 इंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट का भी अहम योगदान है। चैनल ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया था कि कैसे अवैध और अंधाधुंध खनन अरावली को खोखला कर रहा है। इसके बाद सरकार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए यह सख्त कदम उठाया है।

पर्यावरण मंत्रालय का सख्त आदेश

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बुधवार (24 दिसंबर) को सभी संबंधित राज्यों—हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली—को निर्देश जारी किए हैं।

क्यों जरुरी था यह फैसला?

अरावली पहाड़ियाँ थार रेगिस्तान को उत्तर भारत की उपजाऊ जमीन की तरफ बढ़ने से रोकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अरावली खत्म हुई, तो दिल्ली-एनसीआर रेगिस्तान बन जाएगा और भूजल स्तर (Groundwater Level) पाताल में चला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में अवैध खनन पर चिंता जताई थी।

सरकार का विज़न: केंद्र सरकार का कहना है कि वह अरावली के इकोसिस्टम (Ecosystem) को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह फैसला ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ को सुरक्षित रखने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

Dintoday की राय :

विकास जरुरी है, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं। अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, हमारी साँसे हैं। मोदी सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन असली जीत तब होगी जब अवैध खनन पूरी तरह बंद हो जाएगा।

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