Site icon

US ने लगाया $100,000 का H-1B वीज़ा शुल्क, भारतीय सरकार ने कहा– मानवीय असर होगा

Donald Trump and PM Narendra Modi face-off over H-1B visa fee hike, India responds strongly.

नई दिल्ली :
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीज़ा पर $100,000 की नई फीस लगाने के फैसले पर भारत ने कड़ा एतराज़ जताया है। भारत सरकार ने इसे “मानवीय परिणामों वाला कदम” बताया है और कहा है कि यह भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों पर गंभीर असर डालेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बयान दिया कि “वे हमारी प्रतिभा से डरते हैं, इसमें कोई शक नहीं।”

H-1B वीज़ा क्या है और भारत क्यों है सबसे बड़ा लाभार्थी

H-1B वीज़ा स्कीम के तहत अमेरिकी कंपनियां आईटी, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विदेशी स्किल्ड वर्कर्स को नियुक्त कर सकती हैं। भारत इस स्कीम का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है, 2024 में स्वीकृत वीज़ाओं में से 71% भारतीयों को मिले।
व्हाइट हाउस ने दावा किया कि इस वीज़ा का दुरुपयोग हो रहा है और अमेरिकी कंपनियां स्थानीय कर्मचारियों को हटाकर सस्ते विदेशी श्रमिक रख रही हैं। वर्तमान में अमेरिकी आईटी सेक्टर में 65% कर्मचारी H-1B वीज़ा धारक हैं।

भारत सरकार और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला परिवारों के लिए गंभीर व्यवधान पैदा करेगा और उम्मीद जताई कि अमेरिकी प्रशासन इस पर पुनर्विचार करेगा।
Nasscom, भारत का आईटी ट्रेड बॉडी, ने कहा कि यह कदम अमेरिका की इनोवेशन इकॉनमी पर नकारात्मक असर डालेगा और बिजनेस व प्रोफेशनल्स के लिए अनिश्चितता बढ़ाएगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि इस मुद्दे को “युद्धस्तर पर” हल किया जाए क्योंकि राज्य से बड़ी संख्या में आईटी वर्कर्स अमेरिका जाते हैं।

उद्योग और स्टॉक मार्केट पर असर

इस फैसले के बाद भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों जैसे Infosys और TCS के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Apple, Microsoft, Google और JP Morgan जैसे क्लाइंट्स के साथ काम करने वाली भारतीय कंपनियां सीधे प्रभावित होंगी।
इमिग्रेशन लॉयर्स के मुताबिक, वीकेंड पर हजारों कॉल्स आईं क्योंकि कंपनियां और कर्मचारी यह समझने में उलझे थे कि नियम कब और कैसे लागू होंगे।

भारतीय कर्मचारियों में डर और भ्रम

PTI से बातचीत में एक भारतीय कर्मचारी ने कहा, “यह ट्रैवल बैन जैसा है। यहां तक कि जिनके पास वैध वीज़ा है, उन्हें भी $100,000 फीस का सबूत देना होगा।”
कई भारतीय और चीनी कर्मचारी अपनी छुट्टियां बीच में छोड़कर जल्दबाज़ी में अमेरिका लौट आए ताकि वीज़ा न रद्द हो जाए।

आगे का रास्ता

भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह शुल्क लंबे समय तक लागू रहा तो न केवल भारतीय आईटी उद्योग बल्कि अमेरिका की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को भी नुकसान होगा।

निष्कर्ष:
H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी से भारत-अमेरिका रिश्तों में नई तनातनी देखने को मिल रही है। भारतीय सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख दिखाया है, लेकिन अगले कदम पर सभी की निगाहें वॉशिंगटन और नई दिल्ली की बातचीत पर टिकी हैं।

 इस खबर पर लगातार अपडेट के लिए DinToday.com से जुड़े रहें।

Exit mobile version