
क्या वास्तव में एडॉल्फ हिटलर नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित हुए थे?
बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर का नाम भी कभी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। लेकिन इस घटना के पीछे की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है और इतिहास में यह एक विवादास्पद अध्याय बनकर रह गया।
📌 कहां और कैसे हुआ यह नामांकन?
यह बात है वर्ष 1939 की, जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने से कुछ समय पहले स्वीडन के संसद सदस्य एरिक ब्रांट (Erik Brandt) ने हिटलर का नाम शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया था। हालांकि यह नामांकन पूरी तरह व्यंग्यात्मक (satirical) था और ब्रांट का उद्देश्य नाज़ीवाद की निंदा करना था।
ब्रांट एक प्रसिद्ध समाजवादी विचारधारा वाले नेता थे और वे तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री नेविल चैम्बरलेन को शांति पुरस्कार देने के प्रस्ताव से असहमत थे। इसके विरोधस्वरूप उन्होंने विरोध जताने के लिए व्यंग्य में हिटलर का नाम प्रस्तावित किया।
🤯 विवाद और नामांकन वापसी
नामांकन सामने आते ही यूरोप भर में विवाद छिड़ गया। ब्रांट को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और कुछ ही दिनों के भीतर, 1 फरवरी 1939 को उन्होंने एक आधिकारिक पत्र लिखकर नामांकन वापस ले लिया।
हिटलर का नाम ना केवल विवादास्पद रहा, बल्कि कभी भी नोबेल पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में शामिल नहीं किया गया।
📜 ऐतिहासिक सन्दर्भ
नोबेल पुरस्कार की प्रक्रिया को लेकर यह मामला ऐतिहासिक रूप से बेहद असामान्य माना जाता है। एडॉल्फ हिटलर के शासनकाल में हुए नरसंहार और युद्ध अपराधों के चलते यह विचार भी असंभव लगता है कि उन्हें शांति पुरस्कार के लिए चुना जाए। लेकिन ब्रांट की राजनीतिक व्यंग्यात्मक शैली ने यह असाधारण घटना रच दी।
🔍 विशेषज्ञों की राय
इतिहासकार डॉ. लार्स हॉगसन, जो स्कैंडेनेवियन राजनीति पर रिसर्च कर रहे हैं, बताते हैं,
“यह नामांकन वास्तविक शांति प्रयासों के लिए नहीं था, बल्कि यह उस समय की राजनीति में व्यंग्य के तौर पर किया गया एक विरोध प्रदर्शन था। इसे गलत समझा गया था, लेकिन बाद में स्थिति स्पष्ट की गई।”
💬 सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया
यह खबर हाल ही में सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गई है। कई यूज़र्स चौंक कर पूछ रहे हैं कि “क्या सच में हिटलर को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था?” इस पर इतिहासकारों और तथ्य-जांच वेबसाइट्स ने स्पष्ट किया है कि यह एक विनोदात्मक (sarcastic) नामांकन था, न कि वास्तविक सम्मान का प्रयास।
📍 निष्कर्ष
एडॉल्फ हिटलर का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए जरूर नामित हुआ था, लेकिन यह एक व्यंग्यात्मक प्रस्ताव था जो विरोध में किया गया था। न ही उनका नाम कभी अंतिम सूची में आया और न ही वे इस पुरस्कार के योग्य माने गए।
इतिहास को समझने के लिए संदर्भ और समय की सही जानकारी बेहद ज़रूरी होती है। अफवाहों और वायरल पोस्ट्स के पीछे की सच्चाई को जानना ही समझदारी है।
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