
सिडनी (Sydney): क्या आपने भी सोशल मीडिया पर सिडनी के बोंडी बीच (Bondi Beach) हमले के बाद किसी ‘एडवर्ड क्रैबट्री’ (Edward Crabtree) के हीरो होने की खबरें पढ़ी हैं? अगर हाँ, तो ठहरिये। यह सच नहीं है। इंटरनेट और एआई (AI) द्वारा फैलाए गए इस भ्रम को तोड़ते हुए आज हम आपको उस असली हीरो से मिलवाते हैं जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना बंदूकधारी को दबोच लिया।
उस जांबाज का नाम अहमद अल अहमद (Ahmed Al Ahmed) है।

क्या हुआ था उस शाम?
रविवार, 14 दिसंबर 2025 की शाम सिडनी का मशहूर बोंडी बीच हनुक्का (Hanukkah) के जश्न में डूबा हुआ था। तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से अफरा-तफरी मच गई। हमलावरों ने बेगुनाह लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
जब हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था, तब 43 वर्षीय अहमद अल अहमद भागे नहीं। एक वायरल वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे अहमद ने एक कार के पीछे से निकलकर बंदूकधारी पर पीछे से हमला किया और उसे जमीन पर गिराकर हथियार छीन लिया। इस दौरान उन्हें हाथ और कंधे में गोली भी लगी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
‘एडवर्ड क्रैबट्री’ कौन है? (वायरल झूठ का पर्दाफाश)
घटना के तुरंत बाद, सोशल मीडिया और एलन मस्क के AI चैटबॉट ‘Grok’ ने एक फर्जी खबर फैलानी शुरू कर दी। दावा किया गया कि हमलावर को रोकने वाला व्यक्ति एक “43 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल एडवर्ड क्रैबट्री” है।
सच्चाई यह है:
- एडवर्ड क्रैबट्री नाम का कोई व्यक्ति वहां था ही नहीं। यह एक काल्पनिक नाम था जो एक फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया अफवाहों से पैदा हुआ।
- इस झूठ ने कुछ ही घंटों में अहमद अल अहमद की बहादुरी पर पर्दा डालने की कोशिश की। कई लोगों का मानना है कि यह एक विशेष समुदाय के हीरो को नजरअंदाज करने की साजिश या एल्गोरिदम की गलती हो सकती है।
कौन हैं असली हीरो अहमद अल अहमद?
अहमद कोई आईटी प्रोफेशनल नहीं, बल्कि एक साधारण फल विक्रेता (Fruit Shop Owner) हैं। वे मूल रूप से सीरिया (Syria) के रहने वाले हैं और एक दशक पहले शरणार्थी के रूप में ऑस्ट्रेलिया आए थे। आज वे एक गर्वित ऑस्ट्रेलियन नागरिक हैं।
अस्पताल के बिस्तर से (जहाँ उनका इलाज चल रहा है), अहमद ने सादगी से कहा:
“मैंने जो किया वह इंसानियत के लिए किया। जब मैंने लोगों को गिरते देखा, तो मैं बस रुक नहीं सका। मुझे नहीं पता था कि हमलावर कौन है या किसे निशाना बना रहा है, मुझे बस उन्हें रोकना था।”
क्यों महत्वपूर्ण है यह सुधार?
‘dintoday.com‘ अपने पाठकों तक हमेशा परखी हुई खबरें पहुँचाने में विश्वास रखता है। अहमद अल अहमद की पहचान को सही करना सिर्फ एक नाम सुधारना नहीं है, बल्कि उस साहस को सम्मान देना है जो धर्म, जाति और सरहदों से ऊपर है। एक शरणार्थी, जिसने अपने अपनाए हुए देश के लिए गोली खाई, उसकी जगह किसी काल्पनिक नाम को हीरो बना देना पत्रकारिता और समाज दोनों के लिए शर्मनाक है।
निष्कर्ष: सिडनी आज सुरक्षित है तो उसका बहुत बड़ा श्रेय अहमद अल अहमद को जाता है। सोशल मीडिया पर फैल रहे झूठ से बचें और इस असली हीरो की कहानी को शेयर करें। अहमद अभी अस्पताल में हैं, लेकिन उनका हौसला बुलंद है।
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