
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने गुरुवार (18 सितम्बर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग (Election Commission) पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 में कर्नाटक की अलंद विधानसभा सीट पर 6,000 से ज्यादा वोट गलत तरीके से हटाने की कोशिश हुई थी। EC ने इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन यह माना कि कुछ “अनसक्सेसफुल अटेम्प्ट्स” (असफल प्रयास) हुए थे और उसी आधार पर FIR दर्ज भी की गई थी।
Rahul Gandhi ने क्या कहा?
- Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि 6,018 वोटर नाम डिलीट करने की कोशिश हुई।
- उनका कहना है कि Congress वोटर्स को टारगेट किया गया।
- उन्होंने कहा कि Karnataka CID ने EC से IP Address और OTP ट्रेल मांगे थे, लेकिन डेटा नहीं मिला।
- राहुल ने कहा, “यह साज़िश सॉफ़्टवेयर से बाहर के राज्यों से की गई।”
अलंद मामला कब उठा था?
- 2023 में ही पूर्व कांग्रेस MLA बी.आर. पाटिल ने शिकायत की थी।
- 6,670 वोटर नाम हटाने की कोशिश की गई थी।
- जांच में पाया गया कि 6,018 केस संदिग्ध थे।
- केवल 24 आवेदन सही निकले।
- Assistant Electoral Registration Officer ममता कुमारी ने FIR दर्ज कराई थी।
BLO और Form 7 क्या है?
- Booth Level Officer (BLO) – आमतौर पर शिक्षक, आंगनवाड़ी वर्कर या सरकारी कर्मचारी, जो स्थानीय वोटर्स को अच्छी तरह जानते हैं।
- BLO का काम – वोटर लिस्ट अपडेट करना, फील्ड विजिट करना, मृतक या शिफ्ट हुए नामों को चिन्हित करना।
- Form 7 – वोटर लिस्ट से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने का फॉर्म।
- इसे ऑनलाइन/ऑफलाइन भरा जा सकता है, लेकिन फाइनल डिलीशन से पहले नोटिस और सुनवाई ज़रूरी है।
नाम हटाने का कानूनी प्रावधान
- Section 22, RPA Act 1950 के तहत Electoral Registration Officer (ERO) नाम डिलीट कर सकता है।
- ERO आमतौर पर SDM या सरकारी अधिकारी होते हैं।
- डिलीशन सिर्फ तीन आधारों पर:
- व्यक्ति की मृत्यु,
- दूसरी जगह शिफ्ट होना,
- रोल में अयोग्य पाया जाना।
- हर केस में जांच और नोटिस ज़रूरी।
- नाम हटने पर वोटर अपील कर सकता है—पहले DM और फिर राज्य CEO के पास।
EC की सफाई
ECI ने कहा –
- “Rahul Gandhi का आरोप गलत और बेसलेस है।”
- “कोई भी नाम बिना सुनवाई के डिलीट नहीं हो सकता।”
- “Aland केस में खुद ECI ने FIR दर्ज कराई।”
Conclusion
अलंद वोटर लिस्ट विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में गरम हो गया है। Rahul Gandhi इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपने सिस्टम को सुरक्षित बता रहा है। मामला अभी जांच में है।
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